राज्य सरकार प्रदेश के अधिक से अधिक क्षेत्र को सिंचाई के तहत लाने पर विशेष बल दे रही है। प्रदेश में कुल 55.67 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में से केवल 5.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही कृषि योग्य हैं। एक अनुमान के अनुसार, प्रदेश की कुल सिंचाई क्षमता लगभग 3.35 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को बड़ी एवं मध्यम सिंचाई योजनाओं तथा 2.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लघु सिंचाई येाजनाओं के अन्तर्गत लाया जा सकता है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के अन्तर्गत लाया जाए, ताकि किसानों को कृषि विविधता के लिए प्रोत्साहित किया जा सके जिससे कृषि उत्पाद में भी वृद्धि हो सके। प्रदेश में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर इस वित्त वर्ष के दौरान 216.38 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इस वित्त वर्ष लघु सिंचाई येाजनाओं के अन्तर्गत 3600 हेक्टेयर क्षेत्र तथा बड़ी एवं मध्यम सिंचाई येाजनाओं के अन्तर्गत 3000 हैक्टेयर क्षेत्र को लाया जा रहा है। वर्तमान प्रदेश सरकार के सत्ता में आने के पश्चात् 9878 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के तहत लाया गया है, जिसमें से लघु सिंचाई के अन्तर्गत 4935 हेक्टेयर तथा बड़ी एवं मध्यम सिंचाई योजना के अन्तर्गत 4943 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है।
प्रदेश सरकार का प्रयास है कि राज्य में कार्यान्वित की जा रही वृहद सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्रातिशीघ्र पूरा किया जाए ताकि अधिक से अधिक क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए 310 करोड़ रुपये की वृहद शाहनहर सिंचाई परियोजना के कार्य में तेजी लाई गई है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के 15,287 हेक्टेयर कृषि योग्य कमान्द क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। अभी तक इस परियोजना के अन्तर्गत 272 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं तथा लगभग 8400 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की जा चुकी हैं। इस परियोजना का निर्माण कार्य मार्च, 2012 तक पूरा हो जाएगा तथा यह किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी।
सिद्धाता मध्यम सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। लगभग 66.35 करोड़ रुपये की यह परियोजना मार्च 2011 में पूरी हो जाएगी, जिससे 3150 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मध्यम चंगर सिंचाई परियोजना एक अन्य महत्वकांक्षी परियोजना है, जिसे बिलासपुर जि़ला में कार्यान्वित किया जा रहा है। 88.09 करोड़ रुपये की यह परियोजना पूरा होने पर 2350 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी, जबकि अभी तक 1504 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की जा रही है।
मण्डी जि़ला में बल्ह घाटी (लैफ्ट बैंक) परियोजना के कार्य में भी तेज़ी लाई गई है। लगभग 62.25 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना से क्षेत्र के 2780 हेक्टयेर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इस परियोजना का निष्पादन एक कम्पनी को ‘टर्न-कीÓ आधार पर सौंपा गया है तथा इसका निर्माण कार्य मार्च 2012 तक पूरा कर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने 147.15 करोड़ रुपये की फीनासिंह मध्यम सिंचाई परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी है। इस परियोजना से लगभग 4050 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को केन्द्रीय जल आयोग द्वारा अन्तिम रूप दे दिया गया है तथा राज्य पर्यावरण समिति द्वारा भी इसे शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
कांगड़ा जि़ले की झलाड़ी, भूम्पल तथा पुत्रैल मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को भी स्वीकृति हेतु केन्द्र सरकार को प्रेषित किया गया है। 51.58 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं को आगामी पांच वर्ष के भीतर पूरा किया जाएगा तथा इससे 2280.80 हेक्टेयर को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
प्रदेश सरकार द्वारा त्वरित सिंचाई सुविधा कार्यक्रम के अन्तर्गत लघु सिंचाई परियोजनाओं की दो ‘शैल्फÓ को पूरा किया जा चुका है, जिसमें वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2005 तक 14.05 करोड़ रुपये की 45 लघु सिंचाई परियोजनाएं तथा दूसरी वर्ष 2005 से वर्ष 2009 तक 45.65 करोड़ रुपये की 95 परियोजाएं शामिल है। इन परियोजनाओं से क्रमश: 5637.72 हेक्टयेर तथा 1158.89 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान की गई है। राज्य सरकार द्वारा 116 लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति का मामला भी केन्द्र सरकार से उठाया गया है, जिस पर 120.72 करोड़ रुपये व्यय होंगे तथा 17374.86 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान होगी।
प्रदेश सरकार ने त्वरित सिंचाई सुविधा कार्यक्रम के अन्तर्गत 158.89 करोड़ रुपये की 189 लघु सिंचाई परियोजनाएं शामिल करने का मामला भारत सरकार को प्रेषित किया है। इससे 17028.69 क्षेत्र को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
यह परियोजनाएं 2011 तक पूरी कर दी जाएगी। नाबार्ड तथा आई.आर.डी.एफ. ट्रैंच 13 से 15 के अन्तर्गत 145 करोड़ रुपये लागत की 117 परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। प्रदेश सरकार के इन सत्त प्रयासों के परिणामस्वरूप आने वाले वर्षों में कृषकों को अधिक से अधिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे कृषि पैदावार में वृद्धि होगी और ग्रामीण आर्थिकी में सुधार को सके।
